99 फीसदी स्कूलों में आग बुझाने के उपकरण नहीं: 580 स्कूलाें में बनता है एमडीएम, पर केवल 5-6 स्कूलाें में हैं आग बुझाने के उपकरण, खतरा उठा कर पढ़ रहे हैं बच्चे

रामगढ़7 मिनट पहले

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सिलेंडर गैस के माध्यम से भोजन तैयार करते। - Dainik Bhaskar

सिलेंडर गैस के माध्यम से भोजन तैयार करते।

जिला के 580 स्कूल में करीब 1.50 लाख बच्चों को मध्याह्न भोजन खिलाया जाता है। शत प्रतिशत स्कूलों में गैस चूल्हे के माध्यम से बच्चों का भोजन तैयार होता है, लेकिन 99 फीसदी स्कूलों में आग बुझाने के उपकरण नहीं है। इस कारण बच्चों की सुरक्षा पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। पूर्व में कई स्कूलों में अगलगी की घटना हो चुकी है।

हालांकि जान-माल का नुकसान नहीं हुआ। इसके बावजूद फायर सेफ्टी उपकरण स्कूलों में नहीं होना बच्चों की सुरक्षा के साथ मजाक है। अग्निशमन विभाग के अनुसार रामगढ़ जिला के एक भी सरकारी स्कूल में फायर सेफ्टी उपकरण नहीं है। क्योंकि आज तक कोई भी स्कूल फायर सेफ्टी विभाग से संपर्क नहीं किया है। इस कारण किसी प्रकार की अगलगी घटना होने पर बच्चों की जिंदगी दाव पर होगी।

सभी स्कूलों में गैस चूल्हे पर बन रहा है एमडीएम

जिला अग्निशमन पदाधिकारी महेंद्र सिंह ने कहा कि आज तक किसी भी स्कूल ने अग्निशमन विभाग से संपर्क नहीं किया है। इससे स्पष्ट है कि कोई भी स्कूल फायर सेफ्टी का प्रयोग नहीं कर रही। इस कारण किसी को एनओसी भी निर्गत नहीं किया गया है। जबकि एमडीएम सिलेंडर गैस के चूल्हे से बनता है, इसलिए सभी स्कूल में फायर सेफ्टी जरुरी है।

विकास मद के पैसे खर्च कर सकते हंै: डीईओ

डीएसई नीलम शर्मा ने बताया कि एमडीएम वाले स्कूल प्रधानों को बच्चों से दूर पाकशाला निर्माण करने का निर्देश दिया गया है। साथ ही वहां बच्चों का प्रवेश भी वर्जित रहता है। इसके अलावा स्कूल प्रबंधन विकास मद की राशि फायर सेफ्टी में खर्च कर सकती है।

रसोई के समीप बच्चों को जाने पर रोक : डीएसई

स्कूल प्रधानों को स्पष्ट निर्देश है कि किसी भी कीमत पर रसोई के समीप बच्चों को जाने नहीं दिया जाए। साथ ही एमडीएम तैयार करने के समय जरूरी सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करें। संजीत कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक

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