190 तक कोलेस्ट्रोल लेवल पहुंचे तो अनुवांशिक है: इससे युवाओं में बढ़ रहा है हार्ट अटैक का खतरा, रिसर्चर कर रहे हैं इस पर जीन

हजारीबाग35 मिनट पहलेलेखक: मुरारी सिंह

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कम उम्र के युवाओं में हृदयाघात (हार्ट अटैक) के पीछे बड़ी वजह फेमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया है। यह अनुवांशिक (जेनेटिक) रोग है। इसमें हमारे शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर असामान्य रूप से बढ़ जाता है। उक्त बातें इंस्टीट्यूट ऑफ जिनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी) के रिसर्चर मोहम्मद इमरान ने कही। आईजीआईबी सीएसआईआर की इकाई है। मोहम्मद इमरान फेमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया पर देश भर में चल रहे शोध के क्रम में हजारीबाग सैंपलिंग के लिए पहुंचे थे। मोहम्मद इमरान जीनोमिक्स फॉर अंडरस्टैंडिंग रेयर डिजीज इंडिया एलाइंस नेटवर्क से जुड़कर काम कर रहे हैं।

बच्चों में भी इस रोग के बढ़ने का खतरा, इलाज से नियंत्रण संभव
इस अनुवांशिक रोग से ग्रसित के बच्चों में भी इस रोग के ट्रांसफर होने का खतरा लगभग 50% है। यह रोग लाइलाज नहीं है। इलाज शुरू होने से रोग पर नियंत्रण किया जा सकता है। इमरान ने बताया कि साउथ अफ्रीका और फ्रेंच कैनेडियन में 80 में से एक व्यक्ति में यह रोग मिला है। भारत के 250 लोगों में से एक को फेमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया है।

उत्तर भारत में हुए शोध में पता चला कि हर सात युवाओं के हार्ट अटैक में से एक का मुख्य कारण यही रोग था। देश की विभिन्न जनसंख्या ओं पर काम कर रहे स्नातकोत्तर मानव स्वास्थ्य विभाग के डॉक्टर गंगानाथ झा रिसर्च में जनसंख्या से संबंधित जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं। डॉ झा ने कहा कोलेस्ट्रोल के स्तर को लेकर भ्रांति और झिझक को दूर कर लोगों को जागरूक करने की जरूरत है। अनुवांशिक रोग पर भी नियंत्रण संभव है।

खानपान में बदलाव से कोलेस्ट्रोल का लेवल होता असामान्य

इमरान ने कहा कि खानपान और लाइफस्टाइल में बदलाव के कारण हमारे बॉडी में कोलेस्ट्रोल का लेवल असामान्य हो जाता है। एक स्वस्थ व्यक्ति में कोलेस्ट्रोल का लेवल 100 से कम रहना नॉर्मल है। इससे उपर के लेवल को एबनॉर्मल कहा जाता है। यही लेवल जब 190 से अधिक हो जाय और आंखों और त्वचा पर लक्षण दिखने लगे तो यह फेमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया हो सकता है।

इसमें आंखों के नीचे और पुतली पर उभरे हुए सफेद निशान जेंथोमा बन जाते हैं। कॉर्निया की परिधि में सफेद और पीला बन जाता है। पंजों के जोड़ पर नॉडल्स उभर आते हैं। ऐसे लक्षण हो तो मरीज को अपनी और अपने परिवार के सदस्यों का जेनेटिक टेस्ट कराना चाहिए। जेनेटिक टेस्ट और जिनोम सीक्वेंसिंग से फेमिलियल हाइपरकोलेस्ट्रोलेमिया का कन्फर्मेशन होता है।

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