हॉस्पिटल में बुनियादी सुविधाओं के नहीं रहने से लोग परेशान: 12 X 12 फीट के लैब में हर माह 25 हजार मरीजों की होती है जांच, मरीजों के बैठने की जगह भी नहीं

हजारीबाग42 मिनट पहले

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लैब एक ही टेबल पर रखे गए सैंपल और केमिकल। - Dainik Bhaskar

लैब एक ही टेबल पर रखे गए सैंपल और केमिकल।

उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल का सबसे बड़ा स्वास्थ संस्थान शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल को एक बेहतर लैब तक उपलब्ध नहीं है जहां इलाज के लिए पहुंचे मरीजों का सभी तरह का जांच एक ही जगह उपलब्ध हो जाए। सदर अस्पताल के समय से संचालित लैब अभी भी बरकरार है। यह लैब जगह की कमी और संसाधनों की कमी से जूझ रहा है।

मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल के इस लैब में लिपिड प्रोफाइल टेस्ट भी नहीं हो पाता है। इस जांच के लिए भी लोगों को बाहर के प्राइवेट लैब में जाना पड़ता है। लैब से संबंधित मिली शिकायतों पर हॉस्पिटल सुपरीटेंडेंट डॉक्टर विनोद कुमार सिन्हा ने औचक निरीक्षण किया ।उनके साथ डिप्टी सुपरिटेंडेंट डॉ एके सिंह भी थे।

उन्होंने लैब में काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को मरीजों के साथ कुशल व्यवहार करने का निर्देश दिया वहीं कई उपकरणों का उपयोग जगह के अभाव में नहीं किया जाना पाया गया । फिर उपकरण को रखने के लिए सुपरिटेंडेंट में स्टूल मंगवाने के लिए कहा जिस पर माइक्रोस्कोप रखा गया।

12 गुणा 12 फीट के एक कमरे में यह लैब संचालित है। यहां जांच के लिए पहुंचने वाले मरीजों को बैठने की भी व्यवस्था नदारद है। यहां काम करने वाले स्वास्थ्य कर्मियों को भी जांच के लिए पर्याप्त जगह नहीं है। एक ही टेबल पर सैंपल केमिकल मशीन रखना पड़ रहा है। टेबल लगा देने के बाद बैठकर जांच करने की भी व्यवस्था नहीं है। क्योंकि जगह नहीं बचता है जहां कुर्सी लगाई जा सके।

लैब में लिपिड प्रोफाइल जैसी सामान्य जांच भी नहीं हो पाती, मरीजों को जाना पड़ता है बाहर

आठ टेक्निशियन हैं, यहां 32 तरह के टेस्ट की है सुविधा
इस लैब का एक माह में 25,000 से अधिक टेस्ट का है रिकॉर्ड: लैब टेक्नीशियन मनोज कुमार ने बताया कि जगह के अभाव के कारण टेस्ट में दिक्कत हो रही है। बावजूद इसके हर माह 25000 से अधिक टेस्ट का रिकॉर्ड हमारा है। इस लैब में आठ टेक्नीशियन पदस्थापित हैं।

4-4 टेक्नीशियन का दो शिफ्ट है। टेस्ट का ओवरलोड है। हर रोज सैंकड़ो मरीज टेस्ट के लिए पहुंचते हैं जिनमें कई मरीजों का एक से अधिक 5-6 टेस्ट तक शामिल होता है। यहां 30 से 32 तरह का टेस्ट संभव भी है। जिसमें आरबीसी, प्लेटलेट्स काउंट, डिफरेंशियल काउंट, न्यूरो फील, लिंफोसाइट, एओसिनोफिल्स, मोनोसाइट्स , हेमोग्लोबिन, डायबिटीज, बीटी-सीटी आदि शामिल हैं। अभी लिपिड प्रोफाइल टेस्ट नहीं हो पा रहा है। जगह कम है मशीन कहां रखें। कभी कभी काफी भीड़ हो जाने से परेशानी होती है।

सुपरिटेंडेंट ने किया निरीक्षण, कहा-बहुत जल्द नए भवन में शिफ्ट होगा लैब, जांच में मरीजों को होगी सुविधा

सुपरिटेंडेंट डॉ विनोद कुमार सिन्हा ने कहा कि लैब के लिए नई बिल्डिंग बनकर तैयार है ।उम्मीद करते हैं कि अगले माह में वहां लैब शिफ्ट करा देंगे, फिर यह लैब स्पेशियस हो जाएगा और संसाधनों से भी लैस होगा। फिर जांच का भी दायरा बढ़ेगा लैब का विस्तार भी होगा।

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