हमारे मेहमान: लालसर का समूह जिस जलस्त्रोत पर दिखे, समझ लें पानी स्वच्छ है

हजारीबागएक घंटा पहले

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शीतकालीन जलीय प्रवासी पक्षियों में है कॉमन पोचार्ड, जो लालसर बत्तख के नाम से जाना जाता - Dainik Bhaskar

शीतकालीन जलीय प्रवासी पक्षियों में है कॉमन पोचार्ड, जो लालसर बत्तख के नाम से जाना जाता

शीतकाल के प्रवास पर हजारीबाग आने वाले जलीय पक्षियों में एक है कॉमन पोचार्ड। इनको स्थानीय लोग लालसर बत्तख के नाम से जानते हैं। कॉमन पोचार्ड, रेड क्रेस्टेड पोचार्ड से काफी हद तक दूर से एक समान दिखता है। कॉमन पोचार्ड स्वच्छ मीठे जलाशय और तालाबों में भी पहुंचते हैं। इस पक्षी को हजारीबाग बड़े झील में भी देखा जाता था, लेकिन इस साल पोचार्ड झील नहीं पहुंचा है। हजारीबाग के छड़वा डेम में इनका समूह पहुंच गया है।

कॉमन पोचार्ड स्वच्छ पानी वाले जलाशयों को पसंद करते हैं जिस जगह से का पानी प्रदूषित हो गया तो उस जगह को छोड़ नए जलाशय को शीतकालीन पर्यावास के रूप में चुनते हैं। इनका समूह जिस जलाशय में ठहरा हुआ है तो यह कहा जा सकता है कि जलाशय का पानी मीठा है। इनके समूह के नजदीक जाने पर यह पानी में डुबकी लगा लेते हैं और आगे निकल जाते हैं। इनका झुंड टफ्टेड के साथ पानी में दिखता है।

मुख्य भोजन मछली और जलीय पौधे हैं
इनका मुख्य भोजन वाटर इंसेक्ट, मछली और जलीय पौधे हैं। पानी में डुबकी लगाकर मछली को पकड़ते हैं। नर और मादा एक समान नहीं दिखते। मादा का रंग नर से अलग होता है। नर के सिर और गर्दन का रंग ज्यादा गहरा होता है। इससे इसकी पहचान होती है। यूरोप, नॉर्दन एशिया के देशों से झारखंड आते हैं और एक निश्चित समय तक यहां रहते हैं।

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