सुनील केडिया ने की राेटी देने की शुरुआत: पहली राेटी गाय की, परंपरा जीवित रखने काे अभियान चला रही गाेशाला, 200 लोग जुड़े

गिरिडीहएक घंटा पहले

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गौशाला में गाय को रोटी खिलाते गौ भक्त। - Dainik Bhaskar

गौशाला में गाय को रोटी खिलाते गौ भक्त।

सनातन धर्म में परंपरा रही है कि परिवार में बनने वाली पहली रोटी गाय के हिस्से की होती है। गिरिडीह के पचंबा गोपाल गाेशाला ने इस परंपरा को जीवंत करने की कोशिश की है और वर्तमान में यह एक अभियान का रूप ले चुका है। आठ माह पूर्व महाशिवरात्रि के दिन इसकी शुरुआत महज दो भक्तों ने की थी। आज स्थिति ये है कि गौ भक्तों की लंबी सूची बन चुकी है और गाेशाला के 800 गायों को हर दिन एक की जगह दो रोटी मिलने लगी है।

इस व्यवस्था को नियमित बनाए रखने के लिए गाेशाला की ओर से चलाए जा रहे अभियान में 200 से अधिक लोग जुड़ चुके हैं, जो सिर्फ गिरिडीह जिले के ही नहीं बल्कि पूरे राज्य के अलावा दिल्ली, कोलकाता, मुंबई में रहने वाले लोग भी शामिल हैं। कुल 800 सदस्य बनाने का लक्ष्य है, जिससे गाेशाला की 800 गायों को 365 दिन तक हर दिन 2 रोटी मिलेगी।

पचंबा गोपाल गाेशाला में ऐसे हुई इसकी शुरुआत
हर जगह गाेमाता नहीं होने के कारण लोग सुबह में रोटी लेकर गाेशाला पहुंचते थे और गाय को रोटी खिलाते थे। लेकिन वह एक-दो गाय को ही नसीब हो पाती थी। लिहाजा गाेशाला समिति ने रणनीति बनाई कि हर दिन हर गाय को कम से कम एक रोटी मिले। इसके लिए रोज 800 रोटी की जरूरत पड़ी, जो बाजार अथवा किसी के घर से संभव नहीं था।

इसी बीच गिरिडीह के समाजसेवी मुकेश जलान व बांके बिहारी शर्मा ने 4 लाख की लागत से रोटी बनाने वाली मशीन गाेशाला को डोनेट किया। इसके बाद कुकिंग काॅस्ट के साथ 800 रोटी की कीमत 750 रुपए आए, जिसकी शुरुआत 1 मार्च 2022 से मखन लाल जलान व सुनील केडिया ने की। इसके बाद हर दिन किसी न किसी गौ भक्त से यह डोनेशन मिलना शुरू हो गया। जन्मदिन, शादी सालगिरह व अन्य शुभ कार्य में लोग एक-एक दिन का जिम्मा लेने लगे।

बाद में गाेशाला समिति ने निर्णय लिया कि एक नहीं बल्कि हर दिन गायों को अब दो-दो रोटी मिलनी चाहिए। जिसमें सालभर का बजट 16.80 लाख रुपए आया। जिसे 2100 रुपए करके 800 गौ भक्तों के हिस्से में बांटा गया है और पिछले एक सप्ताह से सदस्यता अभियाना चलाया जा रहा है। इसमें फिलहाल 200 से अधिक लोग जुड़ चुके हैं।

गाय को रोटी खिलाने से 33 कोटी देवी-देवताओं को लगती है भोग : पंडित
पुजारी राजकिशोर पांडेय ने कहा गौ भक्तों का यह प्रयास सराहनीय है। गाय को इस धरती पर साक्षात देव स्वरुप माना जाता है। गाय माता के खुर्र में नागदेवता, गोबर में लक्ष्मी जी, मूत्र में गंगाजी का वास होता है। जबकि गौ माता के एक आंख में सूर्य, दूसरी आंख में चंद्र देव व पूंछ में हनुमानजी का वास होता है। गाय माता से ही मनुष्यों के गाेत्र की स्थापना हुई है। गौ माता 14 रत्नों में एक रत्न है। कहा जाता है कि गाय को चारा खिलाने से तैंतीस कोटी देवी देवताओं को भोग लग जाता है।

हर दिन सुबह 8 बजे तक गायों को मिल जाती है रोटी: गौ भक्त विमल केडिया व अमित जलान ने कहा कि अब सभी गाय को हर दिन दो रोटी मिलती है। मशीन से एक घंटे में 600 रोटी तैयार होती है। 3 घंटे में 1600 रोटी बन जाती है। हर दिन सुबह 8 बजे तक गायों को मिल जाती है।

अनवरत चलता रहेगा अभियान : ध्रुव सोंथालिया: गोपाल गौशाला के सचिव ध्रुव सोंथालिया ने कहा कि पहली रोटी गाय की अभियान अब अनवरत चलता रहेगा। इस अभियान के प्रति गौभक्तों की अपार आस्था है, और नित्य दिन नए-नए लोग इस अभियान से जुड़ रहे हैं।

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