सरकारी पैसे की बर्बादी: बिना किसी के रहे करोड़ों के आवास जर्जर, अब हो रही है मरम्मत

चतराएक घंटा पहलेलेखक: ​​​​​​​विपिन कुमार सिंह

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काम कर रहा कारीगर। - Dainik Bhaskar

काम कर रहा कारीगर।

सरकारी पैसे की बर्बादी देखना है तो चतरा आइए। चतरा का भवन प्रमंडल “गोइठा में घी” सुखाने वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है। भवन प्रमंडल एक ऐसी योजना पर सरकार की करोड़ों रुपए बेकार में फूंके जा रहा है। जिस योजना पर करोड़ों रुपए बर्बाद किया गया ,उस योजना से एक भी लोगों को लाभ नहीं पहुंचा। यहां बात हो रही चतरा प्रखंड कार्यालय के पास सरकारी कर्मियों के लिए बनाए गए तीन बी टाइप आवास की।

वर्ष 2007 में भवन प्रमंडल के द्वारा लगभग पांच करोड़ रुपए की लागत से 12 फ्लैट का तीन बड़े-बड़े बी टाइप आवास बनाया गया था। भवन बने 15 वर्ष बीत गया। इन 15 वर्षों में उक्त तीनों आवासों में एक भी दिन कोई पदाधिकारी व कर्मी नही रहें। भवन पूरी तरह से भूतबंगला का रूप धारण कर चुका था। कुछ दिन बाद ही चोर यहां के खिड़की, दरवाजा व सभी वैसा सामाग्री जो ले जा सकते थे, ले गए। विभाग का करोड़ों रुपए डूब गए। अब 15 साल बाद फिर से भवन प्रमंडल की नींद टूटी और तीनों भवनों की मरम्मती के लिए लगभग एक करोड़ रुपए का टेंडर निकाला। टेंडर फाइनल भी हुआ और एक ठेकेदार फिर से भवन की मरम्मती कराने में जुटा है।

भवन मरम्मती के नाम पर भी खानापूर्ति की जा रही है। 15 वर्ष पूर्व भवन में लगे लोहे के खिड़की दरवाजे को बदलने के बजाय उसमें वेल्डिंग कर काम चलाऊ बनाया जा रहा है। भवन में टाइल्स भी सबसे निम्न स्तर का लगाया जा रहा है। भवन प्रमंडल कार्यालय के पीछे मरम्मत किए जा रहे भवन की निगरानी ठीक से नही होना कई सवाल खड़ा करता है।

बगैर कोई उपयोग के भवन मरम्मती को लेकर विभाग के पास नहीं है कोई जबाब
भवन प्रमंडल के कार्यपालक अभियंता उदय नारायण चौधरी से जब इस मामले में जानने का प्रयास किया गया तो इसपर कुछ भी बोलने से बचते रहे। उन्होंने कहा कि वे इस मामले में बहुत कुछ नहीं बता सकते। जिला स्तरीय बैठक में साहेब लोग का निर्देश मिला तो उन्होंने भवन मरम्मती के लिए टेंडर निकाल दिए।

जब उनसे पूछा गया कि क्या कैंपस में पानी की व्यवस्था की गई है तो उन्होंने कहा कि पानी की व्यवस्था करना उनका काम नहीं है। जब उनसे पूछा गया कि उक्त आवास में कौन पदाधिकारी रहेंगे तो उनका कहना था कि पता नही कौन रहेंगे। उन्हें भवन का मरम्मत करवाना था सो करवा रहे हैं।

यह है कारण – ड्राई जोन है यह इलाका, 500 फीट बोरिंग के बाद भी नहीं निकलता पानी
जिस जगह पर बी टाइप आवास का निर्माण कराया गया है। यह इलाका पूरी तरह से ड्राई जोन है। इस क्षेत्र में पानी ही नहीं है। आवास बनने के बाद कैंपस में कई बोरिंग कराया गया। लेकिन कोई भी बोरिंग सक्सेस नहीं हुआ। कैंपस व आसपास के इलाकों में पांच -पांच सौ फीट गहरा बोरिंग के बाद भी पानी नहीं निकलता है।

यही वजह है कि काफी आकर्षक व सुंदर बनाए गए बी टाइप आवास में एक भी दिन कोई अधिकारी व कर्मी नहीं रह पाए। अब सब कुछ जानते सुनते हुए भी विभाग की ओर से उक्त भवनों की मरम्मत के नाम पर करोड़ रुपए खर्च करना समझ से परे है।

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