मैं मुखियापति काम बताइए: 59 मुखियाओं का मोबाइल कॉल पति ने रिसीव किया, कहा- मैं ही असल मुखिया

धनबाद3 घंटे पहलेलेखक: केके सुनील

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पंचायती राज व्यवस्था - Dainik Bhaskar

पंचायती राज व्यवस्था

गांव की सरकार में आधी आबादी की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पंचायती राज व्यवस्था में 50% सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गई हैं, ताकि वे भी पुरुषाें के साथ मिलाकर गांव के विकास में भागीदार बनें। महिला सशक्तीकरण काे बढ़ावा मिले। जिले में अप्रैल-मई में हुए पंचायत चुनाव में जिला परिषद की कुल 29 सीटाें में दाे तिहाई महिला सदस्य चुनी गईं। पहली बार जिला परिषद अध्यक्ष व उपाध्यक्ष महिलाएं हैं। 256 पंचायतों में 153 पर इस बार महिलाएं जीत कर आई हैं।

महिलाओं की अच्छी-खासी भागीदारी काे देखते हुए जिला परिषद अध्यक्ष शारदा सिंह ने सभी महिला जनप्रतिनिधियाें से अपील की थी कि वे स्वयं आगे आएं। लाेगाें का फाेन उठाएं, उनकी समस्याएं काे सुनें। तभी समाधान काे लेकर आत्मबल आएगा। लेकिन पंचायत चुनाव के 6 महीने बाद भी गांव की सरकार में महिला जनप्रतिनिधि सशक्त भूमिका में नहीं हैं। बुधवार को भास्कर टीम ने जिले की 95 महिला मुखिया के माेबाइल नंबर पर कॉल किया। उद्देश्य था-गांव के विकास पर उनकी योजनाएं जाना।

चौंकाने वाला तथ्य यह सामने आया कि इनमें 84 महिला मुखियाओं का मोबाइल रिश्तेदाराें ने रिसीव किया। अधिकतर ने कहा…मैं मुखियाजी का पति। अन्य ने कहा…मैं देवर, मैं बेटा…बोलिए, क्या काम है। सिर्फ 11 महिला मुखियाओं ने अपना मोबाइल रिसीव किया।

बाघमारा: 39 में 26 के पति व 10 के बेटे-देवर ने उठाया
बाघमारा प्रखंड में 61 पंचायतों में 39 में महिला मुखिया हैं। सभी के अधिकृत मोबाइल नंबर पर कॉल किया गया। 36 का मोबाइल रिश्तेदारों ने रिसीव किया। इनमें 26 के माेबाइल पर उनके पति से बात हुई। कई मुखिया के पति ने यहां तक कहा-मुखियाजी सिर्फ सरकारी बैठक के लिए हैं। असल मुखिया मैं ही हूं। क्या काम है…बताइए? इसके अलावा 10 मुखिया के माेबाइल बेटा, बेटी, देवर ने उठाया। जिन 3 महिला मुखिया ने स्वयं कॉल रिसीव किया, उनका कहना था-पति से बात कर लीजिए, वही काम देखते हैं।

गाेविंदपुर: 20 महिला मुखिया के पति ने पूछा-क्या काम है?
गाेविंदपुर में 38 पंचायत में 20 महिला मुखिया जीत कर आई हैं। इनमें 16 महिला मुखिया के मोबाइल पर कॉल करने पर 11 के पति ने उठाया। कहा कि मैं मुखिया जी का पति बाेल रहा हूं। क्या काम है बताएं? मुखिया जी सिर्फ सरकारी बैठक में भाग लेती हैं। जनता का काम ताे मैं ही करता हूं। एक मुखिया ने स्वयं उठाया, लेकिन उन्हाेंने कुछ बताने से इनकार किया। कहा-पति से ही बात कर लीजिए।

बलियापुर : 12 में से 8 के पति और एक के प्रस्तावक ने किया रिसीव
बलियापुर प्रखंड में कुल 23 मुखिया के पद हैं, उनमें 12 महिलाएं जीत कर आई हैं। इनमें 10 महिला मुखिया के मोबाइल पर कॉल किया गया तो 8 के पति ने रिसीव किया। उनके पतियों ने कहा-जनता का काम ताे मैं ही करता हूं। मुखियाजी ताे सिर्फ सरकारी बैठक में भाग लेती हैं। दाे मुखिया में एक के प्रस्तावक व एक के देवर ने फाेन रिसीव किया।

निरसा : 10 में से 5 महिला मुखियाओं ने खुद रिसीव किया भास्कर का कॉल
निरसा प्रखंड में महिला सशक्तिकरण की स्थिति सबसे अच्छी मिली। कुल 27 मुखिया के पद में 16 सीट पर महिलाएं जीतकर आई हैं। इनमें 10 महिलाओं के फाेन पर बात हुई, इनमें 5 महिला मुखिया ने स्वयं और 5 के रिश्तेदाराें ने उठाया। रिश्तेदाराें का कहना था कि मुखियाजी का सारा काम वे ही करते हैं। महिला सीट होने के कारण घर की महिला को चुनाव में उतारा गया था।

ताेपचांची प्रखंड : 14 में 10 के मोबाइल पतियों के पास
ताेपचांची प्रखंड में कुल 28 पंचायत में 14 पर महिला मुखिया जीत कर आईं हैं। दाे ने फाेन ही नहीं उठाया। एक महिला मुखिया ने स्वयं कॉल रिसीव किया। बाकी 11 फाेन नंबर पर उनके रिश्तेदाराें से बात हुई। इसमें भी 10 मुखिया पति ने फाेन उठाया। कहा-क्या जानकारी लेनी हैं, बताएं। हम ही उनका काम-काज देख रहे हैं।

एग्यारकुंड: 5 मुखियाओं में 4 के पति व एक के बेटे ने किया रिसीव
एग्यारकुंड प्रखंड में कुल 20 पंचायत में 11 महिलाएं जीत कर आई हैं। इनमें 5 महिला मुखिया के माेबाइल पर कॉल किया, तो उनमें 4 के पति तथा एक के बेटा ने रिसीव किया। कहा कि मुखियाजी सरकारी बैठकों में जाती हैं, लेकिन उनका सारा काम वे ही देखते हैं।

टुंडी : 5 में 3 के पति ने कहा-मुखियाजी सिर्फ बैठक के लिए
टुंडी प्रखंड में कुल 17 पंचायतों में 9 पर महिलाएं जीत कर आई हैं। इनमें 5 को कॉल किया तो एक ने स्वयं रिसीव किया। बाकी 4 में तीन के पति और एक के बेटा ने उठाया। कहा कि मुखिया जी का सारा काम वे ही देखते हैं। मुखियाजी सिर्फ बैठक में भाग लेती हैं।

मुखियापतियों का दर्द… 15वें वित्त के अलावा काेई फंड नहीं
जिन 95 महिला मुखिया के मोबाइल पर कॉल किया गया, उन्हें रिसीव करने वाले उनके रिश्तेदारों का एक ही रोना था-पंचायत चुनाव के 6 माह हाे गए, लेकिन अब तक 15वें वित्त के अलावा राज्य सरकार से काेई फंड नहीं आया है। सारा विकास कार्य ठप है। सरकार आपके द्वार कार्यक्रम के कारण भी विकास कार्य प्रभावित हुआ है।

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