बीज की बुआई में हाेता है मशीन का उपयाेग: जीराे ड्रिल मशीन का उपयाेग नहीं, 5 वर्ष पूर्व किसानाें काे खेती के लिए दिया गया था

जामताड़ा31 मिनट पहले

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जीरो ड्रिल सीडिंग मशीन। - Dainik Bhaskar

जीरो ड्रिल सीडिंग मशीन।

जामताड़ा जिला में 50 से अधिक कृषक मित्रों को मिले जीरो ड्रिल सीडिंग मशीन बिना उपयोग सड़ने लगे हैं। गेहूं, मकई आदि बुवाई के लिए जीरो ड्रिल सीडिंग मशीन अर्थात बीज बुआई मशीन जिला कृषि कार्यालय के आत्मा द्वारा कृषक मित्रों को अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों के सहयोग के लिए वितरण किया गया था। परंतु पिछले 5 वर्ष पूर्व सरकार द्वारा दिए मिले यह मशीन का उपयोग क्षेत्र के किसी भी फसल बुआई में नहीं हो रहा है। यह मशीन सिर्फ कृषक मित्रों के घरों की शोभा बढ़ा रही है।

वहीं कई कृषक मित्रों के घर में रखे रखे जंग लगने के साथ मशीन सड़ने की कगार में आ गई है। जिले में एक सौ से अधिक कृषक मित्र कार्यरत हैं जिसमें आधे से अधिक कृषक मित्रों को यह मशीन नि:शुल्क उपलब्ध कराया गया था। हालांकि यह मशीन बड़े प्लॉट में खेती करने वाले किसानों के लिए बहुत उपयोगी है परंतु क्षेत्र में छोटे-छोटे खेत के टुकड़े एवं जिला में कृषि के बाद जय हो खेती कम मात्रा में होने के कारण इसकी आवश्यकता वही वही इसकी उपयोगिता एवं किस प्रकार किसानों को उपलब्ध हो इसकी जानकारी भी क्षेत्रवासियों को नहीं है।

जानकार बताते हैं कि यह बुवाई मशीन ट्रैक्टर के माध्यम से एक साथ जुताई एवं समान दूरी पर बीज बोने का कार्य करती हैं। सरकार द्वारा प्राप्त शत-प्रतिशत अनुदान पर वितरण किए गए यह प्रति मशीन की कीमत करीब 70 हजार जिले में इस अनुसार जिले में 35 से 40 लाख के बीच किया मशीन वितरण की गई है

क्या है जीरो सीड ड्रिल मशीन
सीड ड्रिल एक कृषि उपकरण है जो फसलों के लिए बीज बोता है। यह बीज को मिट्टी में रखता है और उन्हें समान रूप से वितरित करने के लिए एक विशिष्ट गहराई तक दबा देता है। यह कृषि उपकरण बीज को मिट्टी से ढकने के लिए एक समान दर बीज डालता है। इससे किसान धान, बाजरा, मूंगफली, गेहूं, मक्का, मटर, मसूर, सोयाबीन, आलू, प्याज, लहसुन, सूरजमुखी, जीरा, चना, कपास आदि फसलों की बुवाई को सरलता से कर सकते हैं।

कृषक मित्र गुलाब अंसारी ने बताया कि सरकार द्वारा मशीन तो उपलब्ध करा दिया गया है परंतु क्षेत्र में बड़ी-बड़ी समतल जमीन नहीं मिलती है यह मशीन ट्रैक्टर के माध्यम से 1 एकड़ से अधिक की खेत में आसानी से बुवाई करने का काम हो पाता परंतु बड़ी जमीन एवं क्षेत्रवासियों को द्वारा हर मौसम में फसल नहीं लगाने के कारण इसकी उपयोगिता नहीं पड़ रही है।

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