बीआईटी इनोवेशन: आर्सेनिक रिमूवल फिल्टर का मिला पेटेंट, आर्सेनिक प्लस 5 व प्लस 3 दोनों को हटाने में सक्षम

रांची

आर्सेनिकयुक्त पानी पीने से यह त्वचा रोग - jharkhand samachar

आर्सेनिकयुक्त पानी पीने से यह त्वचा रोग

बीआईटी मेसरा में इस साल एक महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट को पेटेंट मिल चुका है, जिसका नाम सिंपलिफाइड एंड अफोर्डेबल आर्सेनिक फिल्टर, ‘साफ’ है। इसके माध्यम से आम लाेगों को आर्सेनिक रहित शुद्ध पेयजल मिलेगा। इस फिल्टर को 4 हजार रुपए तक तैयार किया जा सकता है, जो 5 साल तक बिना मेंटेनेंस के चलेगा। यह फिल्टर रोज 200-240 लीटर तक जल शुद्ध कर सकता है। यह फिल्टर आर्सेनिक से होने वाले स्किन डिजीज, कैंसर जैसे बीमारियों से निजात दिलाएगा।

इसके अलावा कई ऐसे प्रोजेक्ट भी हैं, जिनका पेटेंट हो चुका है या पेटेंट की राह में हैं। बीआईटी मेसरा में सत्र 2022-23 के लिए अब तक 50 ग्रांट मिले हैं। कुल अनुदान राशि 7.6 करोड़ रुपए है। इसमें 36 रिसर्च ग्रांट, 7 फैलोशिप ग्रांट और 7 ट्रेनिंग व वर्कशॉप प्रोजेक्ट शामिल हैं। ये सभी ग्रांट केंद्र से इस वित्तीय वर्ष यानी अप्रैल से अब तक मिले हैं। बीआईटी मेसरा के डीन रिसर्च एंड डेवलपमेंट डॉ. सी. जगन्नाथन ने बताया कि किसी भी संस्थान में रिसर्च एक महत्वपूर्ण विभाग होता है। इससे इनोवेशन को बढ़ावा मिलता है।

फिल्टर 4 हजार रुपए में तैयार होगा, जो 5 साल चलेगा, यह रोज 240 लीटर तक शुद्ध जल देगा

पिछले सत्र में मिले थे कुल 36 ग्रांट

पिछले सत्र 2021-22 के लिए 36 ग्रांट मिले थे। इसमें 25 रिसर्च ग्रांट, पांच फैलोशिप ग्रांट व 6 ट्रेनिंग वर्कशॉप थे। 8.9 करोड़ रुपए का अनुदान मिला था। इसमें केंद्र के साथ राज्य सरकार द्वारा भी अनुदान प्राप्त हुआ था, जिन पर काम चल रहा है।

फायदा… कैंसर और त्वचा की बीमारियों से निजात दिलाएगा आर्सेनिक रिमूवल फिल्टर

कॉलेज के रिसर्च ऑफिसर डॉ. संजय कुमार स्वांइ की अगुवाई में रसायन विज्ञान विभाग की प्रोफेसर डॉ. उषा झा, रिसर्च स्कॉलर अमूल्य प्रसाद पांडा और बीएआरसी मुंबई की वैज्ञानिक डॉ. संयुक्ता ए. कुमार ने इस आर्सेनिक फिलट्रेशन सिस्टम को विकसित किया है। यह भूजल में आर्सेनिक प्रदूषण से लड़ने में सक्षम है। दो प्रकार के आर्सेनिक प्लस 5 व प्लस 3 होते हैं। जो भी फिल्टर डेवलप हुए हैं उनमें ज्यादातर आर्सेनिक प्लस 5 को रिमूव करते हैं। वहीं यहां तैयार किया गया फिल्टर दोनों प्रकार के आर्सेनिक को हटाने में सक्षम है। आर्सेनिक के अलावा फिल्टर आइरन, फौस्फेट, मैंग्नीज जैसे रसायनों को भी विश्व स्वास्थ्य संस्था के अधिनियमित मात्रा तक लाता है।

सफलता- क्षतिग्रस्त या टूटी हुई हड्डी को बायो एक्टिव बोन सब्सटिट्यूट जोड़ने में मददगार

कॉलेज के बायो इंजीनियरिंग एंड बायो टेक्नोलॉजी विभाग से डॉ. स्नेहा सिंह व उनकी टीम तथा आईआईटी कानपुर के बायोलॉजिकल साइंसेज एंड बायो इंजीनियरिंग विभाग से प्रो. अशोक कुमार टीम के साथ बायो एक्टिव बोन सब्सटिट्यूट पर रिसर्च कर रहे हैं। यह प्रोजेक्ट अभी पेटेंट के प्रोसेस में है। डॉ. स्नेहा सिंह ने बताया कि मेजर इंज्यूरी में धातुओं से बने मेडिकल इंप्लांट की सहायता से क्षतिग्रस्त हड्डी को ठीक किया जाता है।

हमारी टीम जिस विकल्प पर काम कर रही है, वह बायो एक्टिव बोन सब्सटिट्यूट है, जो नैनो-हाइड्रॉक्सीऐपैटाइट और अन्य चीजों से मिलाकर बनाया गया है। यह सब्सटिट्यूट कुछ समय के लिए आपके शरीर में रहेगा और हड्डी को जोड़ने में मदद करेगा।

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