प्रवासी पक्षियाें का नहीं हाे रहा है आगमन: जलकुंभियाें से बिगड़ गई चितरंजन के डैम की खुबसूरती, दाे वर्ष से नहीं हुई है सफाई

चित्तरंजन39 मिनट पहले

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अपने प्राकृतिक खूबसूरती की वजह से चितरंजन रेल नगरी जहां लोगों का मनोरम स्थल बना हुआ है वहीं पशु पक्षी भी यहां की प्राकृतिक खूबसूरती की वजह से खींचे चले आते हैं। लेकिन इस वर्ष चितरंजन स्थित विभिन्न डैम की प्राकृतिक खूबसूरती को जलकुंभी ने बिगाड़ रखा है जिस वजह से प्रतिवर्ष आने वाले प्रवासी पक्षियों इस वर्ष चितरंजन रेल नगरी में देखने को नहीं मिल रहा है।

पंछी प्रेमियों ने बताया कि प्रत्येक वर्ष लगभग आठ नौ प्रजाति की प्रवासी पक्षी नवंबर माह में चितरंजन रेल नगरी पहुंच जाते थे मगर इस वर्ष यहां के डैम की साफ-सफाई नहीं होने से यह पंछियों अब चितरंजन रेल नगरी में देखने को नहीं मिल रही है। प्रत्येक वर्ष लगभग तीन-चार हजार पक्षी यहां आते थे मगर इस वर्ष दो तीन सौ की संख्या में ही पक्षी देखने को मिल रही है।

चितरंजन स्थित विभिन्न डैम की साफ-सफाई पिछले 2 वर्ष से नहीं हुई है जिस वजह से इस वर्ष पूरे तालाब में जलकुंभी ने घेर रखा है जिस वजह से प्रवासी पक्षी यहां ना कर दूसरे क्षेत्रों में लौट जा रहे हैं। पक्षियों की कलकल करती आवाज नवंबर से मार्च माह तक चितरंजन के डैम में सुनाई पड़ती थी मगर इस वर्ष पक्षियों का झुंड देखने ही नहीं मिल रहा है।

विभिन्न प्रजाति के आते थे पक्षी
चितरंजन रेल नगरी में प्रतिवर्ष आने वाले प्रवासी पक्षियों में नॉर्थन पिंटेल, नॉर्थन सोवेलर, पुरपील मोरहेन, कोटेन पेगामी गोसी, रेड क्रिस्टेड, टूफ्टेड डक सहित कई प्रवासी पक्षियों इस मौसम में चितरंजन रेल नगरी में प्रवास करती थी जो इस वर्ष देखने को नहीं मिल रहा है। विशेषज्ञों की मानें तो एशिया में कड़ाके की ठंड की वजह से वहां से पक्षी भोजन की तलाश में हजारों किलोमीटर दूरी सफर कर इस एरिया में आते हैं ताकि उन्हें आसानी से भोजन मिल सके।

मेंस कांग्रेस ने की डैम की सफाई की मांग
एनएफआईआर से सम्बद्ध चित्तरंजन रेलवे मेंस कांग्रेस नेता इंद्रजीत ने चिरेका जीएम से हस्तक्षेप कर गुहार लगाई है। अस्पताल डैम, करनाल सिंह पार्क डैम और बोटिंग क्लब डैम को जलकुंभियों ने घेर लिया है। अधिकारी कोर्ट केस का बहाना बनाकर डैम की सफाई नहीं करवा रहे है। डैम गंदे पानी और जलकुंभी से भरे हुए हैं। इस वजह से चित्तरंजन बस्ती के निवासी सहित पशु पक्षियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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