पुल नहीं बनने से ग्रामीणों में निराशा देखी जा रही: 14 जान जाने के बाद भी बारबेंदिया पुल काे लेकर गंभीर नहीं हुई सरकार

जामताड़ा2 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक
बराकर नदी के बिरगांव- बारबेंदिया घाट - Dainik Bhaskar

बराकर नदी के बिरगांव- बारबेंदिया घाट

जामताड़ा और धनबाद जिला के निरसा प्रखंड के बीच बराकर नदी किनारे बसे बारबेन्दिया-वीरग्राम पुल नहीं बनने से ग्रामीणों में निराशा देखी जा रही है। फरवरी माह में एक नाव डूबने में 14 लाेगाें की जान जाने के बाद भी राज्य सरकार इस मामले में अब तक गंभीरता नहीं दिखा रही है। जबकि मुख्यमंत्री ने जल्द इसके निर्माण की घाेषणा तक कर दी।

ऐसा लग रहा है कि उक्त पुल सिर्फ घोषणाओं का पुल बन कर रह गया है। स्थानीय लोगों को लोगों को निरसा, गोविंदपुर आसनसोल इत्यादि जगह चितरंजन मैथन होकर घूम कर जाने में 50 किलोमीटर की अधिक दूरी तय करना पड़ता है। अगर यहां पुल बन जाए तो जामताड़ा क्षेत्र के लोग मात्र 10-15 किलोमीटर में ही गोविंदपुर पहुंच जाएंगे। बराकर नदी घाट के किनारे बसने वाले दर्जनों गांव के किसान, मजदूर, सब्जी विक्रेता, राजमिस्त्री, छात्र एवं छात्राएं, मरीज, फेरीवाला सगे संबंधी एवं अन्य कार्यों के लिए वीरग्राम बारबेन्दिया नदी घाट पार होकर निरसा, केलियासोल, आसनसोल, मुगमा, कंचनडीह, गोविंदपुर, चिरकुंडा, कुल्टी, दुर्गापुर इत्यादि जगह रोजी रोजगार एवं अन्य कामों के लिए रोजाना सैकडों लोग नाव के सहारे आर पार होते हैं।

ज्ञात हो कि वर्ष 2007 में गणेश राम डोकानिया ठेकेदार द्वारा 58 खंभा वाला पुल का निर्माण कार्य बरबेंदिया नदी घाट पर किया जा रहा था। इस दौरान पांच खंभा पानी के तेज बहाव में झुक गया था। तब से नदी घाट का पुल अधूरा है। हालांकि भौतिक निरीक्षण करने पर देखा जा सकता है कि यह अधूरा पुल आधा से अधिक नदी के दोनों किनारों से बनकर तैयार है। जब नदी में पुल का पांच पिलर धंस गया तब पुल की उच्च स्तरीय जांच की गई। पुल निर्माण भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया। जिस वजह से यह पुल आज तक अधूरा पड़ा हुआ है।

पुल निर्माण संघर्ष समिति ने मुख्यमंत्री काे साैंपा मांग पत्र बारबेंदिया पुल निर्माण संघर्ष समिति की ओर से दो सूत्री मांग पत्र मुख्यमंत्री को सौंपा गया। समिति के अध्यक्ष अशोक कुमार महतो ने रांची स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय जाकर यह मांग पत्र सौंपा। उन्होंने बताया कि, बरबेंदिया पुल निर्माण को लेकर झारखंड सरकार घोषणा कर चुकी है समय बीतता जा रहा है लेकिन पुल निर्माण के कार्य को धरातल पर नहीं उतारा जा सका। बड़े दुर्भाग्य की बात है 14 वर्ष बीत जाने के बावजूद भी आज तक इस क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण इस पुल को आज तक किसी भी सरकार ने नहीं बनाया।

विगत फरवरी माह में नाव दुर्घटना में 14 व्यक्तियों की डूबने के बाद भी सरकार इसे गंभीरता से नहीं ले रही। इसी कारण लोगों में गहरी असंतोष की भावना है। कभी जांच के नाम पर तो कभी डीपीआर बनाने के नाम पर सिर्फ लोगों को बरगलाने का कार्य किया जा रहा है। यह बहुप्रतीक्षित पुल बन जाने से जामताड़ा सहित पूरा संथाल परगना सीधे-सीधे नेशनल हाईवे दो के साथ सीधे जुड़ जाएगा और पूरे संथाल परगना के विकास का मार्ग प्रशस्त होगा।

खबरें और भी हैं…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

YouTube
YouTube
Instagram
WhatsApp