पत्थर से बनाई रुई: धनबाद के इस प्रोडक्ट का दिल्ली मेट्रो, काठमांडू, बेंगलुरु, चंडीगढ़ व रांची एयरपोर्ट की छत में हुआ इस्तेमाल, लोगों को मिल

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धनबादएक घंटा पहले

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दीपावली यानी माता लक्ष्मी की पूजा और धन, वैभव का उत्सव। - Dainik Bhaskar

दीपावली यानी माता लक्ष्मी की पूजा और धन, वैभव का उत्सव।

दीपावली यानी माता लक्ष्मी की पूजा और धन, वैभव का उत्सव। इस बार दीपावली के अवसर पर दैनिक भास्कर अपने पाठकाें काे ऐसे उद्याेगाें, काराेबाराें और उद्यमियाें से रू-ब-रू करा रहा है, जाे धनबाद का वैभव बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। इनकी सेवाएं और उत्पाद धनबाद के साथ साथ देश-दुनिया के भी काम अा रहे हैं। इनकी उद्यमशीलता से राेजगार, विकास और आर्थिक संपन्नता का रास्ता तैयार हाे रहा है। प्रस्तुति : जीतेंद्र कुमार

जमीन ढूंढ़ी, 17 तरह के लाइसेंस लिए, फिर पानी का इंतजाम कर 2012 में शुरू किया उत्पादन

त्थर से रुई बनाना… यह अपने-आप में अनाेखा है। अक्सर ख्याल आता था कि क्या धनबाद में इस रॉक वूल उद्याेग काे शुरू किया जा सकता है। हम पहले ट्रांसपाेर्टिंग और बैट्री के काराेबार से जुड़े थे। काफी साेच-विचार के बाद राॅक वूल इंडस्ट्री लगाने का फैसला किया। उद्याेग के लिए जमीन की तलाश, 17 तरह के लाइसेंस, बिजली और पानी का इंतजाम करना चुनाैतीपूर्ण था। तमाम मुश्किलात के बावजूद साल 2012 में राॅक वूल का उत्पादन शुरू किया।

काराेबार चल निकला। हालांकि, एक दाैर ऐसा भी आया, जब लगा कि उद्याेग बंद करना हाेगा। लेकिन हिम्मत नहीं हारी। कुछ समय बाद फिर स्थितियां बेहतर हाेने लगीं। आज 500 से अधिक लाेगों को इससे रोजगार मिल रहा है।

इंसुलेटर के रूप में हाेता है इस्तेमाल
अंदर की गर्मी को बाहर जाने से रोकने या किसी जगह को ठंडा रखने के लिए बाहर की गर्मी को आने से रोकने के लिए रॉक वूल की दीवार बनाई जाती है। यह इंसुलेटर का काम करता है।

एनटीपीसी, डीएचएल जैसे खरीदार
दिल्ली मेट्रो, काठमांडू, बेंगलुरु, चंडीगढ़, रांची एयरपोर्ट की छत, झारखंड हाईकोर्ट की छत-दीवार, देशभर के कई मॉल, मल्टीप्लेक्स, कोल्ड स्टोरेज, ग्रीन हाउस, कारखानों में धनबाद के रॉक वूल का इस्तेमाल हुआ है। एनटीपीसी, डीएचएल जैसी कंपनियां खरीदार हैं।

सफलता के 3 मंत्र

1. प्रयाेगात्मकता – नए तरह का प्राेडक्ट बनाने का फैसला। 2.अात्मविश्वास – विपरीत परिस्थितियाें में भी डटे रहे। 3. ईमानदारी – उत्पाद की गुणवत्ता से समझाैता नहीं।

ऐसे तैयार होता है रॉक वूल

भट्ठी में 1100o ताप पर पत्थर को पिघलाते हैं। स्पिनर टायर्स से यह जेल और रेशेदार पदार्थ में बदल जाता है। फिर तेज एयर प्रेशर से हल्की सफेद रुई में बदल जाता है।

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