नियमावली में होगा संशोधन: वित्त रहित स्कूल-कॉलेजों का अनुदान दोगुना करने की तैयारी; माध्यमिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में बनी कमेटी

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रांची8 मिनट पहले

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झारखंड राज्य वित्त रहित शैक्षणिक संस्थान अनुदान (संशोधित) नियमावली 2015 में एक बार फिर संशोधन हो सकता है। - Dainik Bhaskar

झारखंड राज्य वित्त रहित शैक्षणिक संस्थान अनुदान (संशोधित) नियमावली 2015 में एक बार फिर संशोधन हो सकता है।

झारखंड राज्य वित्त रहित शैक्षणिक संस्थान अनुदान (संशोधित) नियमावली 2015 में एक बार फिर संशोधन हो सकता है। राज्य के वित्त रहित उच्च विद्यालयों और इंटर कॉलेजों काे मिलने वाले अनुदान को दोगुना तक बढ़ाने की तैयारी हो रही है। वर्तमान वित्तीय वर्ष से ही यह अनुदान बढ़ाया जा सकता है। ऐसा हुआ तो राज्य के 500 वित्त रहित संस्थानों को इसका लाभ मिलेगा। हालांकि अधिकारियों ने अभी पूरी तरह से खर्च का आकलन नहीं किया है, फिर भी एक अनुमान के मुताबिक राज्य सरकार पर करीब 75 करोड़ रुपए का बोझ बढ़ेगा।

माध्यमिक शिक्षा निदेशक की अध्यक्षता में इस विषय पर विचार करने के लिए एक कमेटी गठित हुई है। निदेशालय स्तर पर इसकी शीघ्र बैठक होनेवाली है। निर्णय के बाद मदरसों, संस्कृत विद्यालयों और इंटर कॉलेजों को इसका लाभ मिलेगा। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे खर्च का आकलन करें और अनुदान बढ़ाने पर शीघ्र निर्णय लें। अनुदान बढ़ने के बाद राज्य के वित्त रहित उच्च विद्यालयों, इंटर कॉलेजों के साथ ही राज्य के वित्त रहित प्राथमिक और मध्य विद्यालयों को भी इसका लाभ मिलेगा। गौरतलब है कि करीब सात वर्ष पूर्व राज्य सरकार ने वित्त रहित स्कूलों और इंटर कॉलेजों की अनुदान राशि बढ़ाई थी।

500 संस्थानों को लाभ, 75 करोड़ रु. का बढ़ेगा बोझ

कम से कम 50% हो रिजल्ट

इन वित्त रहित उच्च विद्यालयों और इंटर कॉलेजों को छात्र संख्या और जैक बोर्ड परीक्षा में छात्रों को मिली सफलता के आधार पर अनुदान की राशि दी जाती है। छात्रों का कम से कम 50 प्रतिशत रिजल्ट आने पर ही अनुदान देने की व्यवस्था है।

वेतन पर खर्च होती है 85% राशि

अनुदान की करीब 85 प्रतिशत राशि वेतन भुगतान पर खर्च होती है। 15 प्रतिशत राशि स्कूल-कॉलेजों में लाइब्रेरी, प्रयोगशाला, आईसीटी लैब, स्मार्ट क्लास आदि के विकास पर खर्च करने का प्रावधान है। अनुदान की राशि से अप्रशिक्षित शिक्षकों को वेतन देने की मनाही है।

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