झारखंड सरकार ने प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी: गढ़वा में 16 करोड़ की लागत से पांच पुलों का होगा निर्माण… स्वीकृति मिली, बढ़ेगा विकास

गढ़वा2 घंटे पहले

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गढ़वा विधायक सह झारखंड सरकार के पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री मिथिलेश कुमार ठाकुर ने कहा कि गढ़वा विधानसभा क्षेत्र के विभिन्न नदी व नालों पर पांच उच्चस्तरीय पुल का निर्माण किया जाएगा। करीब 16 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले इन पांच पुलों की ग्रामीण विकास विभाग झारखंड सरकार ने प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। शीघ्र ही निविदा की प्रक्रिया पूर्ण कर निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।

उन्होंने कहा कि गढ़वा सदर प्रखंड, मेराल व रंका प्रखंड में एक-एक और रमकंडा में दो पुलों का निर्माण किया जाएगा। इसके तहत रमकंडा प्रखंड के हरहे व चटकमान के बीच हातू नदी पर तीन करोड़, 21 लाख, 51 हजार रुपए की लागत से, बलीगढ़ पंचायत के कुसमार गांव में सड़काही नदी पर दो करोड़, 74 लाख, 94 हजार पांच सौ रुपए, गढ़वा सदर प्रखंड के नावाडीह गांव के उरांव टोला में बंडा नदी (अन्नराज) पर तीन करोड़, सात लाख, 20 हजार 600 रुपए, मेराल प्रखंड के पढ़ुआ व रकियाढेरी बीच लोकल नाला पर तीन करोड़, 11 लाख, पांच हजार 300 रुपए और रंका प्रखंड के चुतरू पंचायत में बंदू से अनहर रोड में सोरतघटी नदी पर तीन करोड़, आठ लाख, 99 हजार, 400 रुपए की लागत से उच्च स्तरीय पुल का निर्माण किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि जो वादा करते हैं उसे भूल नहीं जाते हैं।

बल्कि पूरी तत्परता के साथ एक-एक कर पूरा करेंगे। मेरी कथनी और करनी में कोई फर्क नहीं है। उन्होंने कहा कि चुनाव से पूर्व एवं चुनाव के बाद भी क्षेत्र भ्रमण के दौरान उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों की दुर्दशा देखी है और उसी समय उन सभी समस्याओं को दूर करने का संकल्प लिया है। जो अब एक एक कर पूरा किया जा रहा है।

उक्त गावों में पुल नहीं होने के कारण ग्रामीणों को बरसात के समय में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। परंतु अब आगामी बरसात से पूर्व ही ग्रामीणों की समस्या दूर हो जाएगी। पिछले कई दशकों से ग्रामीण इन पुलों के निर्माण की मांग कर रहे थे।

पिछले चुनाव में क्षेत्र भ्रमण के दौरान मैंने ग्रामीण जनता से यह वादा किया था कि यदि मैं प्रतिनिधि बनता हूं तो अपने कार्यकाल में इनका निर्माण ज़रूर कराऊंगा। आज अपना वादा पूरा करते हुए असीम प्रसन्नता हो रही है। उन्होंने कहा कि समस्याएं अपार हैं और संसाधन सीमित है। उन्हीं सीमित संसाधनों में अपने लिए अधिकतम संभावनाओं की तलाश कर लेनी है।

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