झारखंड में आईटी की रेड में 2 करोड़ कैश मिले: कांग्रेस के 2 विधायकों और करीबियों के 50 ठिकानों पर पड़े थे छापे

रांची5 मिनट पहले

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झारखंड में आयकर विभाग की रेड में 2 करोड़ नगद मिले हैं। 100 करोड़ रुपए के निवेश और लेनदेन के डॉक्यूमेंट मिले हैं। एक ग्रुप के पास लौह अयस्क का बेहिसाब स्टॉक पाया गया है। आईटी की टीम ने 4 नवंबर को दो कांग्रेस विधायक जयमंगल सिंह और प्रदीप यादव के अलावा इनके करीबी समूहों के ठिकानों पर छापे पड़े थे। नगदी किसके यहां से मिली है, इसका खुलासा आयकर विभाग ने अभी नहीं किया है।

झारखंड, बिहार और पश्चिम बंगाल के 50 जगहों पर छापेमारी की गई थी। इसमें कोयला व्यापारी, परिवहन, लौह अयस्क और स्पंज आयरन के प्रोडक्शन में शामिल कंपनियां थी। इस छापे में 2 करोड़ रुपए नकद, 100 करोड़ रुपए के बेहिसाब निवेश और लेनदेन का खुलासा किया है। इस छापेमारी में कुल 16 बैंक लॉकरों को तलाशी ली गई है।

कांग्रेस के दो विधायक समेत कई व्यापारियों के ठिकानों पर हुई थी छापेमारी
इस छापेमारी में झारखंड कांग्रेस के दो दिग्गज विधायकों जयमंगल सिंह और प्रदीप यादव के घर पर भी छापेमारी हुई थी। रांची, गोड्डा के साथ- साथ बेरमो, दुमका, जमशेदपुर, चाईबासा, पटना, गुरुग्राम और कोलकाता में फैले 50 से अधिक परिसरों में तलाशी ली गई थी। आयकर विभाग ने बताया है कि इसमें भारी संख्या में आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य भी जब्त किए गए हैं।

टैक्स चोरी के लिए अपनाए गये कई गैर कानूनी तरीके
आयकर विभाग ने छापेमारी के दौरान फोन, लैपटॉप और कंप्यूटर की जांच की। तलाशी के दौरान यह भी पता चला है कि कई लोगों ने अचल संपत्तियों में निवेश किया गया है, जिसके स्रोत का पूरी तरह से खुलासा नहीं किया जा सका है। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने बयान में बताया है कि तलाशी अभियान में यह भी पता चला कि सिविल अनुबंधों में शामिल समूहों में से एक खाते की पूरी जानकारी के लिए ठीक से एंट्री तक नहीं रखता। एकमुश्त कच्चे माल की खरीद कर अपने गैर-वास्तविक लेनदेन में एंट्री कर अपने खर्चों को बढ़ाकर दिखा रहा है।
लौह अयस्क का बेहिसाब स्टॉक
एक ग्रुप के पास भारी मूल्य के लौह अयस्क का बेहिसाब स्टॉक पाया गया है। यह स्टॉक कुल कितना है इसका आकलन अबतक नहीं किया जा सका है। इस कंपनी ने कई मुखौटा कंपनियों के माध्यम से बेहिसाब संपत्ति जमा की है। शेयर बाजार में भी निवेश किया है। इस ग्रुप से जुड़े लोगों ने यह भी स्वीकार किया है कि किसी भी सहायक दस्तावेज का सत्यापन नहीं किया था।

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