जनप्रतिनिधि न अधिकारी कर रहे ठाेस पहल: बाईपास रोड की अधिसूचना जारी होने के पांच साल बाद भी निर्माण बना सपना, हर दिन जाम से जूझता है शहर अपना

गिरिडीहएक घंटा पहले

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रेंगती हैं गाड़ियां, स्कूलाें में छुट्‌टी के डेढ़ घंटे बाद घर पहुंचते हैं बच्चे - Dainik Bhaskar

रेंगती हैं गाड़ियां, स्कूलाें में छुट्‌टी के डेढ़ घंटे बाद घर पहुंचते हैं बच्चे

गिरिडीह के लिए बाईपास सपना बनकर रह गया है। अधिसूचना जारी होने के पांच सालों बाद भी गिरिडीह-धनबाद रोड स्थित चतरो से बेंगाबाद तक 26 गांव होकर गुजरने वाले प्रस्तावित बाईपास रोड को सरकार ने ठंडे बस्ते में डाल दिया है। इसका असर अब गिरिडीह में दिखने लगा है। हर दिन सुबह 10 बजे से लेकर देर रात तक सड़कों पर गाड़ियां रेंगती नजर आती है।

चाहे शहर का गिरिडीह-टुंडी रोड हो या, गिरिडीह-मधुपुर रोड, गिरिडीह-जमुआ रोड व डुमरी रोड। हर मार्ग की यही दशा है। इसके अलावा शहर के बड़ा चौक, टावर चौक, कालीबाड़ी चौक, मकतपुर चौक, अलकापुरी चौक, पचंबा रज्जाक चौक, बोड़ो हर जगह जाम हमेशा जाम की स्थिति बनी रहती है। इसका मुख्य कारण है कि जिले की आबादी बढ़ती जा रही है, वाहनों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है।

.लेकिन सड़कें जो दो दशक पूर्व थी आज भी वही है। इसके अलावा अतिक्रमण सबसे बड़ा नासूर बना हुआ है। परिणाम है कि आवागमन के दौरान लोगों को दिन भर परेशानी झेलनी पड़ती है। सड़क जाम का सबसे बड़ा खामियाजा स्कूली बच्चों को झेलना पड़ता है। स्कूल में एक बजे छुट्‌टी होती है तो बच्चे अपने घर ढाई बजे पहुंचते हैं।

इससे बड़ी परेशानी मरीजों को लेकर अस्पताल जा रहे एंबुलेंस को होती है। लेकिन, गिरिडीह की इस गंभीर समस्या पर न तो यहां के जनप्रतिनिधियों ने कोई पहल की और न ही अधिकारियों का ही कोई प्रयास रहा। बाईपास के अभाव में सारी छोटी-बड़ी वाहनों की आवाजाही बीच बाजार से ही होती है और अधिकांश रोड सिंगल हैं, उसमें भी एक चौथाई पर अतिक्रमणकारियों का कब्जा है। ऐसे में तो जाम लगना लाजिमी है।

ट्रैफिक पुलिस भी इस पर बहुत कुछ नहीं कर सकती है। नगर निगम भी कुछ बदलाव के बजाय पुराने ट्रैक पर ही चलना मुनासिब समझती है। यहां तक शहर में वाहनों के लिए कहीं कोई पार्किंग की व्यवस्था नहीं है। पंचमंदिर के पास बाईक पार्क की व्यवस्था है भी की गयी है तो वहां ठेले वालों ने कब्जा कर रखा है। लिहाजा लोगों के समक्ष सड़क पर ही बाईक पार्किंग करने की मजबूरी है।

गिरिडीह शहर को अतिक्रमण से मुक्त करने पर कड़ा रुख अपनाएगा नगर निगम
^गिरिडीह शहर को स्थायी रूप से अतिक्रमण मुक्त करने को लेकर कई बार प्रयास किया गया। फूटपाथियों के लिए कई जगह निर्धारित की गयी है, लेकिन वहां न जाकर लोग सड़क पर ही बैठते हैं। इसी के आड़ में स्थायी दुकानदार भी कुछ बढ़ा देते हैं। इस तरह अतिक्रमण का दायरा बढ़ता जाता है अौर जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। वैसे सरकार को इस संबंध मंे कई प्रस्ताव भेजा गया है, साथ ही नगर निगम इस बाबत कड़ा रूख अख्तियार करेगा।
प्रकाश सेठ, डिप्टी मेयर, गिरिडीह नगर निगम

2017 में बाईपास सड़क निर्माण का बना था खाका
गौरतलब है कि बाईपास निर्माण के साथ गिरिडीह शहर को सड़क जाम से मुक्ति दिलाने का सपना यहां के लोग लंबे समय से देख रहे थे। लेकिन 2017 में सड़क निर्माण की अधिसूचना वर्ष 2017 में जारी हुई थी। जमीन अधिग्रहण की सूची तैयार हो गयी।

चतरो से 34 गांव से होकर गिरिडीह बेंगाबाद रोड में बाईपास को जोड़ना था। इस बीच चतरो, गादी, श्रीरामपुर, पूर्णानगर, मछलाडीह, टीकोडीह और चुंजका, लोहपिटी, सिकदारडीह, तोहियोडीह, मनिकलालो, मसीपीढ़ी, बोड़ो, अंदूडीह, सुंदरटांड़, तेलोडीह, करहरबारी, अकदोनीकला, जरीडीह, पचंबा, कोयरीडीह, सोनबाद, चिलगा, बक्शीडीह, पांडेयडीह, हरिचक, चंदनडीह, अकदोनीखुर्द, योगीटांड़, माथाडीह, महेशलुंडी, कल्याणडीह, सलैया, जीतपुर और परसाटांड़ होकर बाईपास निर्माण प्रस्तावित था। 1644 लोगों की जमीन का मुआवजा देना भी तय हो गया।

44 करोड़ राशि भी सरकार से निर्गत हो चुका था। लेकिन 2020 में ऐन वक्त पर सरकार ने यह कहकर हाथ खड़ा कर दिया कि मुआवजा देने के लिए सरकार के पास इतने रुपए नहीं है। तब से मामला ठंडे बस्ते में पड़ गया है।

हर मार्ग पर दुकानदारों ने कर रखा है अतिक्रमण
दरअसल, दुकानदारों द्वारा अपनी दुकान के सामने करीब 4 से 5 फीट आगे तक सामान फैलाए जाने की वजह से यह स्थिति उत्पन्न होती है। देखा जाए तो गिरिडीह शहर की सभी सड़कें अतिक्रमण की जद में है। मुख्य सड़कों के अलावा शहर की प्राय: सभी सड़कों पर अतिक्रमणकारियों ने कब्जा जमा रखा है। जिन सड़कों की चौड़ाई नक्शा में 20 से 30 फीट है वर्तमान में वह घटकर 10 फीट रह गई है। दरअसल, सड़क के दोनों किनारे दुकानदारों ने कब्जा कर रखा है।

इतना ही नहीं पार्किंग की व्यवस्था नहीं हाेने से ग्राहक भी अपना वाहन सड़क पर ही लगाते हैं। कुल मिलाकर 30 फीट की सड़कें मात्र 10 फीट में सिमट कर रह गई है। नगर निगम व गिरिडीह प्रशासन भी बीच-बीच में अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाती है, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ता है। हटाने के आधे घंटे बाद ही फिर पुरानी स्थिति लौट आती है।

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