चिंतन-मनन करने की योजना है लेसन प्लान: बच्चों को लेसन प्लान के आधार पर पढ़ाने का निर्देश, पर अमल नहीं

मेदिनीनगरएक घंटा पहलेलेखक: श्याम किशोर पाठक

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सरकर ने कोरोना काल के बाद एक बार फिर से शिक्षकों को लेसन प्लान के आधार पर पढ़ाने का निर्देश जारी किया है। इसके लिए यह कहा गया है कि जो शिक्षक बिना लेसन प्लान के पढ़ाते पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। साथ ही निर्देश के आधार पर काम न होने की स्थिति में प्रधानाध्यापकों पर भी कार्रवाई करने की चेतावनी दी गई है। यह कहा गया है कि प्रधानाध्यापकों की यह जिम्मेवारी बनती है कि वे सभी शिक्षकों को लेसन प्लान के साथ ही पढ़ाने के लिए प्रेरित और उपबंधित करें। इस निर्देश का असर जिले के 1 से 8 तक के 2564 स्कूल के 3.93 लाख व 1-12 तक के करीब 2750 स्कूल के 4.25 लाख बच्चों पर होगा।

सरकार ने इसके लिए 15 नवंबर तक की डेडलाइन निर्धारित की है। निर्देश में कहा कि 15 नवंबर तक हर हाल में सभी स्कूल और सभी शिक्षक लेसन प्लान के आधार पर पढ़ाना शुरू कर दें। लेकिन चिंता का विषय यह है कि इस निर्देश को लेकर जिले के पदाधिकारी गंभीर नहीं हैं। इस बाबत समग्र शिक्षा अभियान के एपीओ अशोक रजक से बात करने पर उन्होंने इस संबंध में निर्धारित कार्य योजना और उनकी जिम्मेवारियों के बारे में कुछ बताने के बजाय लेसन प्लान क्या है, यही बताने की चेष्टा करते रहे।

सच यह है कि सरकार की कई महत्वपूर्ण योजनाओं के असफल होने के पीछे विभाग के पदाधिकारियों और कर्मियों का गंभीर नहीं होना जिम्मेवार रहा है। इनकी उदासीनता के कारण कई योजनाएं असफल साबित हुई हैं। राज्य स्तर पर जो भी निर्णय लिए जाते हैं, वह केवल सुर्खियां बन कर रह जाती हैं। उसके धरातल पर उतरते-उतरते या तो सरकार किसी नई योजना अथवा नियमन की बात करने लगती है, या फिर निचले स्तर पर उस योजना के क्रियान्वयन की अगंभीरता के कारण योजना दम तोड़ देती है।

लेसन प्लान बच्चों को पढ़ाने और सिखाने की एक बेहतरीन योजना है, पर बच्चों को लाभ नहीं

दरअसल लेसन प्लान बच्चों को पढ़ाने अर्थात सिखाने की एक बेसिक और बेहतरीन योजना है। लेकिन अध्यापन कार्य एक चुनौती का कार्य है। जहां बच्चों को सिखाना या उन्हें सीखने के लिए उन्हें प्रेरित करना एक बड़ी चुनौतीपूर्ण कार्य है। इसके लिए यह जरूरी है कि बच्चों को बताने से पहले शिक्षक उन्हें सिखाने की विधियों और उस विषय के बारे में जान लें।

उन विधियों और तरीकों पर गम्भीरता से विचार कर यह निर्धारित कर लें कि सिखाने के लिए अपनाया जा रहा उनका तरीका उपयुक्त है अथवा नहीं। मतलब यह कि सीखने के लिये प्रेरित करने और सिखाने से पूर्व गहरा चिन्तन तथा मनन करना जरूरी है। इसके लिए एक कुशल, सचेत और प्रतिबद्ध शिक्षक अध्यापन से पहले शिक्षण के विभिन्न पहलुओं पर विचार करता है। उसपर चिंतन करता है। इसके बाद उस चिंतन, विचार और अपने अनुभवों के आधार पर शिक्षण की योजना बनाती है।लेकिन इसपर गंभीरता से काम नहीं करने के कारण इसका प्रतिकूल अस्र पड़ता है।

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