गरीबों से छलावा: जेनरिक दवाएं 110 रुपए की, डॉक्टर ने लिखी 520 रुपए वाली अंग्रेजी दवा

धनबादएक घंटा पहलेलेखक: जीतेंद्र कुमार

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जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एसएनएमएमसीएच में गरीब आते हैं अपना नि:शुल्क इलाज कराने, पर…डॉक्टर राहत देने के बजाय उन पर आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। 5 नवंबर को सरकार के राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों को निर्देश दिया था कि वहां के डॉक्टर बड़े अक्षरों में दवाओं के नाम जेनरिक लिखें, इसके बावजूद एसएनएमएमसीएच के डॉक्टर जेनरिक के बजाय अंग्रेजी दवाएं लिख रहे हैं।

अंग्रेजी की तुलना में जेनरिक दवाएं दो से चार गुना तक सस्ती होती है, परंतु डॉक्टरों के कारण गरीब मरीजों की जेब पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। भास्कर टीम ने मंगलवार को अस्पताल के ओपीडी और इनडोर के विभिन्न विभागों में पहुंचकर मरीजों की प्रिस्क्रिप्शन देखी तो अधिकतर में डॉक्टरों ने अंग्रेजी दवाएं लिखी थीं।

सर्जरी विभाग; जेनरिक दवाएं लिखते तो मरीज के 514 रुपए बचते

सर्जरी विभाग में भर्ती गाेविंदपुर की 60 वर्षीया बेदाना देवी मंगलवार काे डिस्चार्ज हुईं। कई तरह की दवाएं लिखी गईं। ट्रेड नाम लिखे थे। जेनरिक नाम नहीं था। मरीज को जेनरिक की तुलना में 514 रुपए ज्यादा खर्च कर दवाएं खरीदनी पड़ीं।

बेटे ने कहा…सिर्फ इलाज फ्री, 43 सौ की दवाएं खरीदीं
मरीज के बेटे दिनेश ने कहा कि फीस, बेड चार्ज नहीं लगा। दवाओं पर एक हफ्ते में 4300 रुपए लगे।

एचओडी डाॅ एसके चाैरसिया बोले – जेनरिक दवा लिखने संबंधित निर्देश मिला है। इसे जल्द ही लागू किया जाएगा।

6 दवाएं 824 रुपए में खरीदीं, जेनरिक मेडिसिन स्टाेर में इनकी कीमत 310 रुपए।

हड्डी रोग विभाग… मरीज को लिखीं 410 रुपए महंगी दवाएं

सालपात्रा बलियापुर से अस्पताल में हड्डी राेग विभाग के ओपीडी आई पार्वती कुंभकार काे डाॅक्टराें ने देखा। एक भी जेनरिक दवा नहीं लिखी। डॉक्टर ने अगर बाहर से खरीदने वाली दवाओं के नाम जेनरिक लिखे होते तो 410 रुपए बच जाते।

मेडिकल स्टाेर पर बिल 520 रुपए बना, जबकि जेनरिक सेंटर पर 110 रुपए में मिलतीं।

मरीज ने कहा…अस्पताल में सभी दवाएं नहीं मिल पातीं
मरीज ने कहा कि डाॅक्टराें ने पांच साै रुपए की दवाएं लिख दीं। अस्पताल से एक दवा ही मिली।

एचओडी डाॅ डीपी भूषण बोले: कई जेनरिक दवाओं की सप्लाई नहीं हाेती। मरीज परेशान होता है, इसलिए ट्रेड नेम लिखते हैं।

मेडिसीन विभाग… 363 रुपए ज्यादा देकर खरीदीं अंग्रेजी दवाएं

मेडिसिन के ओपीडी में कुमारधुबी से आए निर्मल हाड़ी काे चिकित्सकाें ने पर्ची पर 4 तरह की दवाएं लिखीं। सबके ट्रेड नेम थे। मेडिकल स्टाेर में 573 रुपए का बिल बना। यहीं दवाएं जेनरिक सेंटर में 363 रुपए कम में उपलब्ध थीं।

मरीज से मेडिकल स्टोर ने 573 रुपए लिए, जेनरिक सेंटर पर दाम 210 रुपए बतया गया।

मरीज ने कहा…लिखी दवाएं अस्पताल में नहीं मिल पातीं
डाॅक्टर की लिखी दवा अस्पताल में नहीं मिली। बाहर खरीदने पर दवा के 573 रुपए चुकाने पड़े।

एचओडी डाॅ ओझा ने कहा…
जेनरिक दवाएं लिखी जाती हैं। इस संबंध में निर्देश प्राप्त हुआ है और इसका हर हाल में पालन होगा।

चर्म रोग विभाग… जेनरिक नहीं होने पर देने पड़े 311 रुपए ज्यादा

मटकुरिया के दिनेश कुमार चर्म राेग विभाग के ओपीडी में पहुंचे। डाॅक्टराें ने 4 तरह की दवाएं लिखीं। एमआरपी के अनुसार दवा के 511 रुपए लिए गए, जबकि जेनरिक दवा लिखने पर मरीज के 311 रुपए बच जाते।

4 दवाएं मेडिकल स्टोर से 511 रुपए में मिलीं, जेनरिक की कीमत सिर्फ 200 रुपए।

मरीज ने कहा…यह कैसी व्यवस्था? दिनेश ने कहा कि जेनरिक दवा लिखते, तो मेरे 311 रुपए बचते। समझ में नहीं आता कि यह कैसी व्यवस्था है?

एचओडी डाॅ एसके मंडल बोले: प्रैक्टिस में नहीं हाेने के कारण डाॅक्टर ट्रेड नेम लिख देतेे हैं। इसे लागू कराया जाएगा।

जेनरिक स्टोर में हैं 200 से अधिक तरह की दवाएं

अस्पताल के ओपीडी स्थिति नि:शुल्क दवा केंद्र पर 26 तरह की दवाएं ही हैं, वहीं अस्पताल के जनऔषधि केंद्र पर 200 से अधिक तरह की दवाएं है। काफी संख्या में मरीज केंद्र से सस्ती दवाएं प्राप्त करते हैं। सभी विभाग के डाॅक्टर जेनरिक दवा लिखें ताे मरीजाें काे आर्थिक रूप से राहत मिलती, पर डाॅक्टर ऐसा नहीं कर रहे।

राहत… जेनरिक मेडिसिन भी लिखते हैं कई डॉक्टर
इसी अस्पताल में कई डाॅक्टर जेनरिक दवा भी प्रिस्क्राइब कर रहे हैं। इनमें पेडियाट्रिक, ईएनटी, मेडिसिन व सर्जरी विभाग के कई डाॅक्टर शामिल हैं। हालांकि इनमें ज्यादातर जूनियर डाॅक्टर हैं।

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