अर्धनिर्मित आवास से बरामद शव की हुई शिनाख्त: युवक के लापता होने पर आरोपी को थाना ले गए थे परिजन, शव मिलने पर अब हिरासत में

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गुमलाएक घंटा पहले

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पुलिस को घटना की जानकारी देते परिजन। - Dainik Bhaskar

पुलिस को घटना की जानकारी देते परिजन।

शहरी क्षेत्र के उरांव क्लब दुंदुरिया स्थित अर्धनिर्मित आवास से बुधवार की रात बरामद शव की शिनाख्त हो गई। सदर थाना क्षेत्र की आंजन पंचायत के मड़वा निवासी सीता देवी ने मृतक की पहचान अपने देवर नारायण साहू के रूप में की है। उसने नारायण के दोस्त मिथलेश साय पर साजिश रचकर हत्या करने या हत्या करवाने की आशंका जताई है। हालांकि हत्या के पीछे के कारणों की स्पष्ट जानकारी नहीं दी। इसके बाद पुलिस मिथलेश को हिरासत में लेकर पूछताछ कर रही है।

पूछताछ में मिथलेश पुलिस को दिग्भ्रमित करते हुए घटना के बाद से ही रटा रटाया जवाब दे रहा है। मिथलेश का कहना है कि घटना के बावत वह कुछ नहीं जानता है। एक नवंबर को नारायण उसके साथ मुर्गा लेने के लिए कोटाम गया था। वहां मुर्गा नहीं मिलने पर दोनों टोटो गांव आए थे। इसी दौरान दो बाइक पर सवार होकर पहुंचे तीन अपराधी नारायण को उठा कर अपने साथ ले गए थे।

इसके बाद डर से वह रातभर झाड़ी में छिपा रहा। दूसरे दिन गांव पहुंचा। हालांकि पुलिस को मिथलेश की बातों पर भरोसा नहीं हो रहा है। वह पुलिस को अन्य कहानियां भी बता रहा है। बताया जाता है कि घटना के दूसरे दिन जब मिथलेश गांव पहुंचा था तब उसके हाथ में चोट भी लगी हुई थी। नारायण का एक मोबाइल ग्रामीणों ने उसके पास से बरामद किया था। जबकि उस फोन का सिम कार्ड वह जला दिया था।

लापता होने के 8 दिन बाद युवक का शव बरामद
भाभी ने कहा कि 9 नवंबर को नारायण का शव शहर से सटे उरांव क्लब के समीप से बरामद किया गया। हत्या करने के बाद शव को एक अर्धनिर्मित भवन में छुपा दिया गया था। शव पर कीड़े रेंग रहे थे। कचरा चुनने वालों ने शव देखा। नहीं तो शव भी नहीं दिखता। भाभी ने कहा कि मिथलेश ने ही साजिश रचकर नारायण की हत्या की है या हत्या कराई है। इसकी गहन जांच कर दोषी को कड़ी से कड़ी सजा मिले। साथ ही मृतक के परिजनों को उचित मुआवजा दिया जाए।

भाभी ने कहा- लापता होने से पहले मिथलेश का धान ढो रहा था नारायण

मृतक की भाभी सीता देवी ने बताया कि नारायण विवाहित है। वह मजदूरी कर पत्नी तेजन देवी व एक वर्षीय बच्चे का भरण-पोषण करता था। घटना के दिन एक नवंबर को वह दिन भर मिथलेश के साथ था। उसी के खेत में धान बोहने की मजदूरी कर रहा था। शाम करीब चार बजे मिथलेश मुर्गा खरीदने की बात कहकर नारायण को अपने साथ ले गया था। इसके बाद से वह लापता हो गया। मिथलेश भी उस दिन गांव नहीं लौटा। दूसरे दिन लौटने पर मिथलेश ने बताया कि वे मुर्गा लेने टोटो गए थे। जहां से मिथलेश अकेला गुमला चला गया।

इसके बाद परिजनों ने नारायण की तलाश की, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। 3 नवंबर को फिर मिथलेश से पूछताछ की गई। तब उसने कहा कि नारायण को टोटो से तीन युवक उठा कर गुमला की ओर ले गए। उसने झाड़ी में छुपकर अपनी जान बचाई। नारायण के मोबाइल के बारे में पूछने पर कहा कि अपराधी मोबाइल को भी लूट कर के गए। फिर चार नवंबर को ग्रामीणों ने मिथलेश से पूछताछ की, तो उसने छोटा मोबाइल वापस लाकर दिया। सिम जला देने की बात कही।

इसके बाद सदर थाना में गुमशुदगी का रिपोर्ट दर्ज कराते हुए मिथलेश को पकड़ कर साथ थाना ले गए। मगर पुलिस ने मामूली पूछताछ के बाद उसे छोड़ दिया। उसे चार दिन थाना ले जाया गया। मगर पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। उसे बार बार थाना से छोड़ दिया गया।

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