अंग्रेजों को तीर धनुष से मार कर भगाया गया: अंग्रेजों से सेरेंगसिया घाटी की लड़ाई जीतने की खुशी में हो समाज ने मनाया विजय दिवस

चाईबासा19 मिनट पहले

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सेरेंग्सिया घाटी विजय दिवस आयोजन समिति सह पूर्व महासचिव आदिवासी हो समाज महासभा के संरक्षक मुकेश बिरूवा के नेतृत्व में अंग्रेजों से सेरेंग्सिया घाटी की लड़ाई जीतने की खुशी में विजय दिवस मनाया गया। सर्वप्रथम घाटी स्थल जहां 19 नवंबर 1837 को अंग्रेजों को शिकस्त दी गई वहां पोटो हो, नराह हो, बुड़ाई हो, पाण्डुवा हो और बोड़ाह हो को याद कर अनुष्ठान किया गया। उसके बाद अंग्रेजों को तीर धनुष से मार कर भगाया गया।

इसलिए उसी जगह पर वैसे ही स्थिति में पारंपरिक तीरंदाजी आयोजित की गई। तीर-धनुष प्रतियोगिता में प्रथम रघुनाथ लागुरी, द्वितीय पुस्तम लगुरी, और तृतीय स्थान अर्जुन लागुरी ने प्राप्त किया। पारम्परिक रस्सी बनाने में प्रथम बुधन लागुरी, द्वितीय सोमबारी हेम्ब्रम और तृतीय स्थान चांद मनी सिद्दू को मिला। पारम्परिक झाड़ू बनाने में प्रथम एस फ्रेस गुमदीबुरु, द्वितीय सुयी लागूरी, और तृतीय स्थान सुशीला लागूरी को मिला।

लकड़ी को घर्षण कर (सेंगेल गुरतुई)आग निकालने में प्रथम स्थान पाली सिंकु, द्वितीय मोटाय लागूरी और तृतीय स्थान सोमा लागूरी को प्राप्त हुआ। धान का पूड़ा बांधने के लिए रस्सी बनाने में प्रथम सूबेदार लागूरी, द्वितीय जूरिया लागूरी, और तृतीय स्थान सूबेदार लागूरी को मिला।मुख्य अतिथि मुखिया लखन लागूरी, और विशिष्ट अतिथि मुंडा बिमल लागूरी उपस्थित थे। मुकेश बिरुवा ने सेरेंग्सिया विजय दिवस की जानकारी दी, और कहा कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर याद करने की जरुरत है। कार्यक्रम को सफल बनाने में सरदार लागूरी, सलूका लागुरी, लेबिया लागुरी, सनातन लागुरी, बामाचरण कुंकल, ओम प्रकाश लागुरी, सूबेदार लागुरी, देवचरण, भूषण लगुरी ने सराहनीय भूमिका निभाई।

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